Hindi kahaniya समुद्र का पानी खारा क्यो moral stories in hindi

panchatantra ki hindi kahaniya


आज हम आपके एक ऐसी कहानी बताने वाले है जिसमे एक  इंसान के लोभ ने उसे मौत के मुंह मे डाल दिया ।
Moral story in hindi का moral है कि चोरी करना बुरी बात है , ओर लालच बुरी बला है ।

इस कहानी के पात्र काल्पनिक है ,

यह कहानी मनोरंजन मात्र लिखी गई है ।


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Moral story in hindi - समुद्र का पानी खरा


एक गांव में दो लकड़हारे रहते है , एक  बहुत धनी था और एक गरीब ।

 दोनो का रोजगार भी एक था , परंतु दोनो की संपत्ति में जमीन आसमान का अंतर था ।

रघु , ओर  महेश

रघु गरीब था , पर ईमानदार और सच्चाई का साथ देने वाला इंसान ।

महेश , चापलूस ओर झूट बोलने वाला इंसान था इसी वजह से झूठ बोल बोल कर महेश है बड़ी सम्पति बना दी थी ।


रघु ईमानदार था इसी लिए वह इतना कमा लेता था कि घर का गुजारा चला सके ।


दीवाली का समय था ।सभी लोग घरों को सजाने के लिए समान खरीद रहे थे परंतु रघु को आपने पेट भरने के लिए खाना मिल जाये , वो ही बहुत था ।


दूसरे दिन ही वो सुबह निकल गया , अपनी लकड़ीया बेचने पर एक भी लकड़ी का बंडल नही बिक ।

वो थक हार कर एक चौराहे पर बैठ गया ।
तब उसकी किस्मत बदल गई ।



सड़क में एक बोना ग़ुज़रा , उठाने रघु को देख ओर बोला की क्या तुम यह लकड़ीया मुझे दोगे ।


रघु ने राहत भरी सांस ली और बोला कि है बेचने के लिये ही है , तब बोना बोलै की तुम्हें यह बंडल मेरी गुफा तक ले जाना होगा ।

में तुम्हें इसके अलग रुपये दूंगा ।

रघु मान गया और बन्डल उठा के बोन के पिछे जाने लगा ।

थोड़ी देर बाद वो दोनों गुफा में आ गए ।




अब रघु ने बन्डल रखा , तो बोने ने उसे एक चक्की दी , रघु बोला इस चक्की का में क्या करूँगा जब मेरे पास कुछ पीसने को नही है ।


तब बोन ने कहा कि यह एक जादुई चक्की है , उसने चक्की एक कपड़े के ऊपर रखी और कहा 


चक्की चक्की गेहू निकाल , चक्की घूमने लग गई और गेहू निकल गया ।




तब बोन ने लाल रंग का कपड़ा चक्की के ऊपर रखा , ओर चक्की बन्द हो गई ।


रघु खुश हो गया , ओर बोन को धन्यवाद कर चक्की लेकर घर चला गया ।


अभी रघु के घर पर भोजन नही बना था , उसी की प्रतीक्षा हो रही थी । 

रघु को चक्की लाते देख उसकी पत्नी निराश हो गई और अंदर चली गई ।


अब रघु ने चक्की एक कपड़े के ऊपर रखी और कहा कि चक्की चक्की आटा निकाल , चक्की से आटा निकलने लग गया ।


रघु की पत्नी खुश हो गई । आज पहली बार उसके परिवार से पेट भर कर भोजन किया ।


अब यह बात तो तय थी कि उसका परिवार अब कभी भूका नही रहेगा ।


अब वो रोज इस तरह अनाज निकलता ओर कुछ रख लेता ओर कुछ बेच देता ।


इससे वह बड़ी जल्दी बहुत धनी हो गया ।



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अब यह बात  महेश को हजम नहीं हुई ,ओर वो उसके घर पर नजर रखने लगा ।

उसे चक्की की बात पता चल गई , ओर महेश

 ने मौका देखते ही चक्की चूरा दी  , ओर  अपने परिवार के साथ गाँव छोड़ कर भाग गया ।

महेश की पत्नी परेशान थी कि हम 

अपनी संपत्ति छोड़ कर एक चक्की लेकर कहा जा रहे है । और हम खायंगे क्या ।

तब समंदर में दूर निकल जाने पर महेश

 ने अपनी पत्नी को चक्की के बारे में बताया ।
उसकी पत्नी को विश्वास नही हुआ , अब उसने दिखाने के लिए चक्की को नाव में रखा और कहा चक्की चक्की नमक  निकाल  ।

नमक निकलने लगा , देखते ही देखते नमक का ढेर लग गया , नाव भारी हो गई ।

महेस ने चक्की को रोकने का तरीका नही देखा था अब उसपर मुसीबत आने वाली थी , अब नाव पूरी भर गई और डूबने लग गई , ओर महेश का पूरा परिवार भी साथ ही डूब गया और मर गया ।।

वह चक्की अभी तक समन्दर में चल रही है जिससे समंदर का पानी खारा है ।



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लालच बुरी बला है , महेश में लालच किया और अपनी जान गवा दी साथ मे अपनी परिवार की जान भी ले ली , यदि वह अपनी आमदनी में खुश रहता तो वह जिंदा रहता ।


हमे कभी किसी को खुश देख कर जलन नही करनी चाहिए ,महेश रघु को देख कर जलता था ।


दोस्तो यह कहानी सिर्फ़ मनोरंजन के लिए लिखी गई है और सारेपात्र काल्पनिक है ।

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