Story in hindi : अंधविश्वास का दुख : moral stories in hindi

Moral stories in hindi : अंधविश्वास का दुख 


यह कहानी है अंधविश्वास के बारे में , की कैसे अंधविश्वास ने  एक इंसान के जीवन को तहस नहस  कर दिया। 
इस hindi story का moral है कि अंधविश्वास पर भरोसा न करे ।


ओर हम किसी भी  के कार्य को बढ़ावा नही देते है ।
इस कहानी का  moral story in हिंदी का मकसद सिर्फ आपको अंधविश्वास कर प्रति सक्रिय करना है ।

तो चलिए kahaniya शुरू करते है ।

अंधविश्वास

Moral ki kahaniya in hindi : अंधविश्वास 

अंधविश्वास हमारे देश मे गावँ में एक अन्धकार की तरह फैल हुया है और हम इससे  तब तक नही जीत सकते जब तक हम शिक्षित न हो जाये ।


यह कहानी  है एक गावँ की  गावँ में  रमेश नाम का एक आदमी था बहुत ही लालची  ।


वह गावं में रहता था परंतु मेहनती बिल्कुल नही था ,  वह दूसरों की सफलता को देख कर जलता ओर सोचता कि काश यह मेरा होता ।

इसी वजह से वह बहुत अंधविश्वास में जीता ।
अक्शर ढोंगी लोगो के साथ बैठकर अपना समय बरबाद करता । पर उसे इतना होस नही था कि सफलता मेहनत से मिलती है अंधविश्वास से नही ।

उसका मानना था कि पूजा पाठ कर के , हम अपनी किसमत को बदल सकते है । और किस्मत में जो है वह बिना किसी मेहनत की मिल जाएगा ।उसने अपना काम छोड़कर ढोंगी लोगो के साथ रहने लग गया ।


उसे धन का बहुत लालच था परन्तु वह बहुत गरीब था । इसी लिए हमेशा ढोंगी लोगो से धन प्राप्ति का आशिर्वाद लेता ।

एक दिन गावँ में दो चोर  आ गए , उन्होंने छुपने के लिए ढोंगी का रूप लिया ।
अब उसकी मुलाकात रमेश से हुई रमेश उनके पास गया और , उसकी सेवा करने लग गया ।


चोर समझ गए कि यह अंधविश्वास वाला है तो उन्होंने एक युक्ति बताई  ।
उन्होंने कहा कि तुम अगर अपने घर मे हवन करोगे तो तुम्हें धन की प्राप्ति होगी ।
रमेश खुश हो गया ।

crime stories in hindi : अंधविश्वास का अंत 


रमेश ने पूजा के लियव चोरो को ही बुलाया , पहले चोर रमेश के घर को लूटना चाहते है पर जब उसे पता चला कि  रमेश एक गरीब इंसान है

 तो वह परेशान हो गये ।
अब वह खुद ही फस गये थे कि हवन करके की करे जब इन्हें लूट नही सकते ।

रमेश की एक बेटी थी , आरती ।
वह बहुत ही ख़ूबसूरत थी , आरती को अंधविश्वास पर बिल्कुल भरोसा नही था , वह एक दुकान में काम करती थी जिससे उनका घर चलता था ।

आरती को देख कर  चोरो के मन की antarvasna जाग गई ।
अब वह धन की जगह में आरती के साथ अपनी antarvasna को खत्म करना चाहते थे ।
उन्होंने झूठा हवन किया और कहा कि आज तुम्हें जरूर धन की प्राप्ति होगी ।

चोरो ने अपने चुराए हुए धन से कुछ हिस्से रात को रमेश के आंगन में रख दिया ।
सुबह को जब रमेश उठा वह बहुत खुश हुआ , उसने धन को अंदर रखा और भाग कर चोरो के पास गया । और उसके पैर पकड़ लिए । 

उसने आज तक इतना धन नही देखा था ।
अब चोरो ने अपनी युक्ति के अनुसार कहा कि तुम्हारे घर पर एक बुरा साया है जिससे तुम कभी भी अमीर नही बन सकते ।

Moral stories in hindi : अन्तर्वासना का अंत : अंधविश्वास का अंत 

रमेश ने पूछा कि अब मुझे क्या करना होगा , तब चोरो ने कहा हमने तुम्हारे घर को ढंग से देखा , बुरा साया कहीं और नही तुम्हारी बेटी के अंदर ही है ।

रमेश ने कुछ सोच और कहा आप सही बोल रहे है गुरुजी वह मेरा कहा भी नही मानती ओर पूजा पाठ भी नही करती ।
अब चोरो ने कहा कि तुम्ह अपनी बेटी के ऊपर एक हवन करने होगा जिससे वह  शुद्ध हो जाएगी , ओर बुरा साया भाग जायेगा ।
वह मान गया , ओर घर गया और बोला कि बेटी आरती तुम तैयार हो जाओ ,हम एक पूजा में जा रहे है । 
गुरुजी ने कहा है कि तुम्हारे अंदर एक बुरा साया है  जिससे हमें धन प्राप्ति नही हुआ ।
आरती डर गई और बोली पिताजी इस प्रकार कुछ नही होता , वह दोनों ढोंगी है ।

रमेश को गुस्सा आ गया और उसने आरती पर थप्पड़ मार दीया ओर कहा कल के हवन से हमे इतना धन मिला है ।
आज के हवन से हम बहुत धनी हो जाएंगे ।

आरती रोने लग गई।यह सब देख कर रमेश की पत्नी को कुछ ठीक नही लगा ।
अब वह कुछ भी नही कर सकती थी ।
रात को रमेश आरती को लेकर मंदिर के पीछे एक कुटिया में ले गया ।
ओर रमेश की पत्नी चुपचाप पुलिस में गई ।और उन्हें बुला लायी ।

अब अंधविश्वास का अंत होना बाकी था ।
चोरो ने रमेश को कहा कि तुम यह पीओ ओर एक मंत्र दिया और कहा कि इसका जाप करो ।
आरती को भी वही पेय दिया । पेय में एक दवाई मिली। थी जिससे वह बेहोश हो गये ।

अब चोरो के सामने बेहोस आरती थी , जिसे देख कर उनकी अन्तर्वासना  उछाल मार रही थी । और यह सब उसी के लिए थे ।
अब दोने चोर आरती पर चिपक गये , उसके साथ शरीरिक शोषण करने लग गए ।
अब इन सब का अंत होना था ।


अब कुटिया में पुलिस या गई , ओर आरती के साथ ऐसा करते देख उन्होंने चोरो को बहुत मार ।
चोरो ने साधु का वेश बदला था तो उसके नकली बाल गिर गये। 
अब पुलिस ने चोरो को पकड़ लिए , आरती को उठाकर हॉस्पिटल लेकर गए ।
उसकी इज्जत लूटते हुए बच गई ।

रमेश को अपना अंधविश्वास भारी पड़ गया उसे भी जेल हो गई ।
चोरो को पकड़वाने के लिए आरती को सरकार की तरफ से ईमान भी मिला और अब वह ओर उसकी माँ शहर में खुश से रहने लगे ।

Moral stories in hindi :अंधविश्वास का अंत : moral of this story

इस कहानी में अपने देखा कि कैसे रमेश ने अंधविश्वास के चलते अपनी बेटी को चोरो को सौंप दिया ।
अंधविश्वास एल श्राप है जिसने इंसान की सोच को खोखला कर दिया है ।
इस कहानी का एक मोरल लालच बुरी बला भी है क्यो की रमेश भी बहुत लालची था ।

अंधविश्वास को सिर्फ़ शिक्षित होकर ही खत्म किया जा सकता है ।
ओर यदि हम अंधविश्वास के झांसे में है तो हमें संभाल कर रहना होगा क्योंकि अंधविश्वास हमे ले डूबेगा ।


मुझे उम्मीद है कि आपको यह कहानी पसंद आई होगी ।
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