परशुराम ने श्रवण कुमार के पैर छुए : हिंदी कहानी

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यह कहानी है परशुराम ओर श्रवण कुमार के  मिलन की ।
जब पहली बार भगवान परशुराम , श्रवण कुमार से मिले थे ।
उनके बीच कुछ इस तरह बाते हुई की , भगवान परशुराम ने श्रवण कुमार के पैर छू लिए ।

 चलिए कहानी शुरू करते है ।

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भगवान परशुराम ओर श्रवण कुमार सवांद : हिंदी कहानियां

एक बार की बात है जब श्रवण कुमार अपने माता पिता को लेकर तीर्थ यात्रा पर जा र हा था तो उसके माता पिता को प्यास लग गई ओर उन्होंने अपने बेटे को कहा की पुत्र हमे प्यास लग गई है की तुम पानी का प्रबंध कर दोगे ।

श्रवण कुमार ने कहा कि में अभी पानी का प्रबंध करता हूं ओर वह अपने अंधे माता पिता को एक पेड़ कि  के नीचे बिठा कर पानी लेने नदी के किनारे चला गया। 

जब श्रवण कुमार ने पानी भरा ओर वह वापिस आ रहे थे तो उन्हें , भगवान परशुराम दिखे। 

भगवान परशुराम ने कहा कि क्या तुम मुझे जल पीने को दोगे ।
अब 
श्रवण कुमार बोला  -  गुरुदेव ने यह पानी अपने माता पिता के लिए  ले जा रहा हूं , मुझे क्षमा करे में आपको पानी पिलाने में सक्षम नहीं हूं। 

अब भगवान परशुराम बोले - 
प्यासे की पानी पिलाना एक पुनय का काम है , ओर फिर में एक ब्रहमान हूं , क्या तुम पाप के भागी बनाना चाहते हो ।

अब श्रवण कुमार बोले  - गुरुदेव में आपको पानी पीला सकता हूं , पर आपको पानी ना पिलाने का सबसे कारण मेरी जाति है ।

गुरुदेव ने एक , निम्न जाति का इंसान हूं ओर आप एक ब्रह्मण में आपको पानी पीला कर पाप का भागी नहीं बनाना चाहता ।

श्रवण कुमार के इस शब्दों को सुन कर भगवान परशुराम को गुस्सा आ गया। 

और अब वह बोले ,श्रवण तुम दिखाने में तो एक  शिक्षित इंसान लगते हो परंतु तुम किसी घिनौनी बाते कर रहे हो  ।

यदि तुम मुझे पानी पिलाना चाहते हो तो पानी पिलाओ ।

अब श्रवण कुमार ने बढ़वान परशुराम को पानी पिलाया ।
और पूछा । गुरुजी आप कोंन है ओर आपके वेशभूषा को देख कर आप ब्रह्मण नहीं लगते , आप हे कोन ?

अब भगवान परशुराम बोले , में एक ब्रह्मण ही हुं परंतु क्षत्रिय राजाओं का अंत करने के लिए मैंने यह हथियार उठाया है ।
श्रवण कुमार ने हाथ जोड़े ओर कहा आप कहीं वहीं भगवान परशुराम तो नहीं , जिन्होंने धरती पर से सारे क्षत्रिय राजाओं को समाप्त कर दिया था ।

में आपके दर्शन करके बहुत धन्य हो गया प्रभु ।

अब भगवान परशुराम ने कहा तुम कोन हो ओर इस जंगल में कहा भटक रहे हो ।

अब श्रवण कुमार ने कहा कि भगवन में श्रवण कुमार हूं , में अपने अंधे माता पिता को तीर्थ यात्रा पर ले जा रहा हूं ।
और मुझे मेरी मूर्खता के लिए क्षमा करे ।

अब परशुराम जी श्रवण कुमार के माता पिता को देखते है ओर कहते है , पर तुम्हारा रथ कहा है ।

अब श्रवण कुमार हाथ जोड़ते हुए कहता है भगवन हम एक गरीब परिवार से है , इसी वजह से हमारे पास रथ नहीं है । और मेरे माता पिता के लिए मेरी कंधा ही उनका रथ है ।

और में अपने माता पिता को कंधे पर लेकर का रहा हूं ।
भगवान परशुराम बोले , में सोचता था कि आज तक धरती पर मेरे जैसा माता पिता से प्रेम करने वाला उनकी अज्ञा मानने वाला पुत्र पैदा नहीं हुआ ।

परंतु आप तुमेह देख कर मेरे अहंकार समाप्त हो गया , तुम्हारे चरण कहा है में तुम्हारे चरण छूना चाहता हूं ।

अब श्रवण कुमार बोला भगवन आप मुझे पाप का भागी ना बनाए ।
भगवान आप मेरे माता पिता को एक बार दर्शन दे तो  मुझे बहुत खुशी होगी ।

परशुराम बोले कि जरुर में भी ऐसे माता पिता से मिलकर धन्य हो जाऊंगा , जिन्होंने ऐसे पुत्र को जन्म दिया ।

भगवान परशुराम ने श्रवण कुमार के माता पिता से मिले ओर उनके पैर छुए , ओर खा माता आप धन्य हो जिसने ऐसे पुत्र को जन्म दिया में आपके दर्शन कर धन्य हो गया ।

End of थे स्टोरीज , हिंदी कहानियां


Hindi kahani ka moral : moral of hindi story 

इस कहानी का मोरल है कि इंसान जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है , जाती इंसान को छोटा बड़ा नहीं बनती ।

जो लोग माता पिता की सेवा करता गए , वह ही सबसे बड़ा है इसी वजह से परशुराम ने श्रवण कुमार को प्रणाम किया ।


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