Best Hindi Poem | बस अब मान लिया हमने खुदा कि मर्जी समझकर | hindi kavita sangrah

 Best Hindi Poem |  बस अब मान लिया हमने खुदा कि मर्जी समझकर | hindi kavita sangrah 

कविता का शीर्षक - बस अब मान लिया हमने 
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 एक बार फिर मिले थे 

खुदा की मर्जी समझकर 

मान लिया हमने 

इश्क़ जताना नहीं आता 

मगर इश्क़ तो है समझकर 

मांन लिया हमने 
जरा अलग थे तुम

शायद मेरे लिए हो समझकर 

मान लिया हमने
दुनिया तो मीलो को थी

दिल के पास हो समझकर 

मान लिया हमने 

आज चुप हो तुम 

कल तो बोलोगे समझकर 

मान लिया हमने  

मुलाकात ना सही

याद तो आती होगी समझकर 

मान लिया हमने 

दस्तूर दुनिया का

ऐसा कुछ था ही नहीं

बस मान लिया हमने



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मुझे उम्मीद है कि आपको hindi poem पसंद आई होगी 

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